गिरिडीह : जिले के गावां प्रखंड के डूमरझारा गांव में निर्माणाधीन सड़क के बीच बनाई गई पुलिया कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब तीन से चार महीने पहले बनी पुलिया पहली बारिश भी नहीं झेल सकी और लगभग एक महीने पहले धंस गई। पुलिया का अधिकांश हिस्सा टूटकर करीब 20 फीट गहरी खाई में जा गिरा है।
यह सड़क डूमरझारा से बरमसिया को जोड़ती है और इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण आवागमन करते हैं। पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के बाद यहां मिट्टी डालकर एक संकरा रास्ता तैयार कर दिया गया है। इसी जोखिम भरे रास्ते से ग्रामीण बाइक लेकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण निर्माण के कुछ ही समय बाद पुलिया धंस गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया होता, तो पहली बारिश के बाद ही पुलिया की यह स्थिति नहीं होती।
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क और पुलिया का निर्माण स्थानीय निवासी मोती साव द्वारा कराया गया है। हालांकि, निर्माण कार्य से जुड़े संवेदक रामचंद्र यादव ने बताया कि उन्हें पुलिया क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि उक्त काम पेटी ठेकेदार को दिया गया था और पुलिया का दोबारा निर्माण कराया जाएगा।

विभाग बोला- जांच के बाद होगी कार्रवाई
मामले में संबंधित विभाग के जीई ने कहा कि यदि निर्माण के बाद पुलिया क्षतिग्रस्त हुई है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि विभाग की ओर से संवेदक को अभी भुगतान नहीं किया गया है।
मिट्टी डालकर बनाया संकरा रास्ता, हादसे का खतरा
पुलिया का बड़ा हिस्सा टूटकर खाई में गिर चुका है। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से पर मिट्टी डालकर किसी तरह रास्ता तैयार किया गया है। रास्ता बेहद संकरा और जोखिम भरा बताया जा रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीण बाइक लेकर इस रास्ते से गुजरते हैं।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब पुलिया का निर्माण कुछ महीने पहले ही हुआ था और उसका बड़ा हिस्सा 20 फीट नीचे जा चुका है, तो निर्माण की गुणवत्ता की जांच कब होगी? वहीं, जब तक पुलिया का दोबारा निर्माण नहीं हो जाता, तब तक इस जोखिम भरे रास्ते से गुजरने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?
ग्रामीणों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने, निर्माण की गुणवत्ता की जांच करने और पुलिया का सुरक्षित एवं मानक के अनुरूप दोबारा निर्माण कराने की मांग की है।


