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करमा महोत्सव पर मंडरखा सुरक्षित वन में पौधरोपण, ग्रामीणों ने लिया संरक्षण का संकल्प

गिरिडीह: करमा महापर्व के अवसर पर गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल के गिरिडीह वन प्रक्षेत्र अंतर्गत मंडरखा सुरक्षित वन में मंगलवार को करमा महोत्सव का आयोजन किया गया। ग्राम वन प्रबंधन समिति, मंडरखा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक उत्साह के साथ पौधरोपण कर प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान करम समेत विभिन्न छायादार प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इस दौरान ग्रामीणों को वृक्षों और पर्यावरण के महत्व के प्रति जागरूक करते हुए लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प दिलाया गया।

प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम में ग्रामीणों ने कहा कि करमा पर्व केवल सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पेड़-पौधों और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी संदेश देता है। ग्रामीणों ने मंडरखा गांव और आसपास के क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण पर जोर दिया।

इस दौरान पौधों की नियमित देखभाल और उनकी सुरक्षा को लेकर सामूहिक संकल्प भी लिया गया। ग्रामीणों ने कहा कि पौधरोपण तभी सार्थक होगा, जब लगाए गए पौधों का संरक्षण कर उन्हें पेड़ बनने तक सुरक्षित रखा जाए।

जनप्रतिनिधि और वन विभाग के अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में मुखिया निरंजन कुमार जनप्रतिनिधि के रूप में मौजूद रहे। वहीं वन विभाग की ओर से फॉरेस्टर की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ। ग्राम वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष बाबूलाल महतो समेत समिति के पदाधिकारी और ग्रामीणों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

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इस मौके पर अधिवक्ता रामप्रसाद वर्मा, भवानी वर्मा, महेंद्र ठाकुर, बद्री ठाकुर, इंद्रदेव महतो, दशरथ महतो, रामचंद्र महतो, बसंत वर्मा, बिनोद तुरी, अर्जुन महतो और बाली राणा समेत समिति के अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

बच्चों और युवाओं ने भी लिया हिस्सा

करमा महोत्सव के तहत आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। शीतल कुमारी, शांति कुमारी, रीना कुमारी, मीनाक्षी कुमारी, सोनाक्षी, वर्षा, वंदना, अंजली और श्रुति सहित कई बच्चों एवं युवाओं ने पौधरोपण में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

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कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों ने करमा पर्व की परंपरा को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी दोहराई। साथ ही मंडरखा सुरक्षित वन और आसपास के क्षेत्रों को हरा-भरा बनाने के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने की बात कही।

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