गिरिडीह: गिरिडीह कॉलेज में कथित वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मामलों की जांच की मांग को लेकर अभाविप की ओर से चल रही नौ दिनों की भूख हड़ताल शनिवार को समाप्त हो गई। प्रभारी प्राचार्य केएन शर्मा और वरिष्ठ सेवा प्रमुख पीएन सिन्हा ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं नीरज चौधरी और अनीश रॉय को जूस पिलाकर और मिठाई खिलाकर अनशन समाप्त कराया। हालांकि, अभाविप ने स्पष्ट किया है कि भूख हड़ताल खत्म हुई है, आंदोलन नहीं। जांच और कार्रवाई होने तक धरना जारी रखने की बात कही गई है।
15 सितंबर से शुरू हुआ था आंदोलन
गिरिडीह कॉलेज में अभाविप ने 15 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया था। संगठन ने कॉलेज से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच, दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई तथा तत्कालीन प्राचार्य और बर्सर को पद से हटाने की मांग उठाई थी। अभाविप का कहना था कि उसने इससे पहले 1 जुलाई 2026 को विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कुलपति को लिखित शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की थी। संगठन के अनुसार, अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद आंदोलन शुरू किया गया।
अभाविप की ओर से कॉलेज में कथित फर्जी हस्ताक्षर, सरकारी बैंक खाते से कथित अनधिकृत निकासी और अन्य वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। ये आरोप संगठन की ओर से लगाए गए हैं; इनकी पुष्टि जांच के निष्कर्ष से होनी बाकी है।

तीन दिन बाद भूख हड़ताल की घोषणा, 19 सितंबर से अनशन
आंदोलन के शुरुआती चरण में अभाविप ने मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर भूख हड़ताल की चेतावनी दी थी। इसके बाद 19 सितंबर को जिला संयोजक नीरज चौधरी और एसएफएस सह-संयोजक अनीश रॉय भूख हड़ताल पर बैठ गए। संगठन ने संबंधित पदाधिकारियों पर कार्रवाई और आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
भूख हड़ताल के दौरान दोनों छात्र नेताओं की तबीयत भी बिगड़ी। 21 सितंबर को चिकित्सकों की टीम ने कॉलेज परिसर में उनकी जांच की और सलाइन चढ़ाया। बेहतर इलाज और निगरानी की सलाह के बाद दोनों को गिरिडीह सदर अस्पताल ले जाया गया।
विश्वविद्यालय से कार्रवाई की मांग, राज्यपाल तक पहुंचा मामला
आंदोलन के दौरान अभाविप ने विश्वविद्यालय स्तर पर कार्रवाई की मांग तेज की। 23 सितंबर को संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल सह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष गंगवार को ज्ञापन सौंपकर मामले की स्वतंत्र, उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच की मांग की। संगठन ने जांच के दौरान संबंधित पदाधिकारियों को प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियों से अलग रखने तथा जरूरत पड़ने पर दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन का फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी रखी।

कुलपति और रजिस्ट्रार पहुंचे कॉलेज, वार्ता नहीं निकला समाधान
25 सितंबर को विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चंद्रभूषण शर्मा और रजिस्ट्रार बीरेंद्र कुशवाहा गिरिडीह कॉलेज पहुंचे और आंदोलनरत छात्रों से बातचीत की। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, वार्ता में तत्काल कोई समाधान नहीं निकल सका और छात्र प्राचार्य को हटाने समेत अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग पर कायम रहे।
छात्रों के अनुसार, कुलपति ने प्राचार्य को हटाने के लिए एक दिन और पूरे मामले की जांच के लिए 14 दिनों का समय मांगा था। इसी बीच विश्वविद्यालय स्तर पर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आई।
नौवें दिन भूख हड़ताल समाप्त, धरना जारी
शनिवार को नौवें दिन प्रभारी प्राचार्य केएन शर्मा और वरिष्ठ सेवा प्रमुख पीएन सिन्हा ने नीरज चौधरी और अनीश रॉय को जूस पिलाकर तथा मिठाई खिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई। छात्र नेताओं ने इसे अपने आंदोलन का एक चरण समाप्त होना बताया, लेकिन जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर धरना जारी रखने की घोषणा की है।
प्रभारी प्राचार्य केएन शर्मा के अनुसार, कुलपति के अधीन जांच टीम का गठन किया गया है और टीम पूरे मामले की जांच करेगी। उन्होंने कॉलेज में छात्रों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराने की बात भी कही।
आगे जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
अब गिरिडीह कॉलेज का यह मामला विश्वविद्यालय स्तर की जांच के अगले चरण में है। अभाविप की ओर से लगाए गए वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों पर जांच टीम का निष्कर्ष सामने आना बाकी है। वहीं, छात्र नेताओं ने कहा है कि जब तक जांच पूरी होकर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
ऐसे में अब विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाले निर्णय से ही यह स्पष्ट होगा कि अभाविप की ओर से लगाए गए आरोपों पर जांच में क्या निष्कर्ष सामने आता है।


