गिरिडीह: पर्यावरण संरक्षण, वायु और जल प्रदूषण पर नियंत्रण तथा औद्योगिक प्रतिष्ठानों में पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती के निर्देश दिए हैं। शनिवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रामनिवास यादव की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण समिति की बैठक हुई।
बैठक में जिले में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों और औद्योगिक इकाइयों द्वारा निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की समीक्षा की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक, पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, नगर निगम, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सीसीएल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अवैध बालू खनन और डंपिंग पर जांच के निर्देश
उपायुक्त ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अवैध बालू खनन, अवैध डंपिंग, स्टोन माइंस और स्टोन क्रशरों की नियमित जांच करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और निगरानी सुनिश्चित करें तथा अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करें।
औद्योगिक इकाइयों में ETP और STP की जांच
औद्योगिक प्रतिष्ठानों में ETP/STP की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी बैठक में जोर दिया गया। इसके अलावा रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था, औद्योगिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण और दूषित जल को उपचार के बाद ही जलस्रोतों में प्रवाहित करने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन की ओर से औद्योगिक इकाइयों में पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की नियमित जांच करने और आवश्यक सुधार सुनिश्चित कराने पर बल दिया गया।
प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सर्वेक्षण
बैठक में प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सर्वेक्षण कराने का निर्देश भी दिया गया। अस्पतालों, नर्सिंग होम और अन्य संबंधित संस्थानों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्धारित मानकों तथा आवश्यक CTO (Consent to Operate) के अनुपालन की जांच करने को कहा गया।
नियमित निरीक्षण और निगरानी पर जोर
उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण, सतत निगरानी और प्रभावी प्रवर्तन के माध्यम से जिले में स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। प्रशासन की ओर से पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी गतिविधियों की लगातार समीक्षा करने की बात कही गई।


